भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों (SR) स्तर की 25वीं सीमा वार्ता द्विपक्षीय संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ साबित हो रही है। वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। ऐसे में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई यह उच्च स्तरीय बातचीत पूर्वी लद्दाख सीमा पर पूर्ण शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बेहद निर्णायक है।
वार्ता के प्रमुख मुद्दे:
- सैनिकों की पूर्ण वापसी (Disengagement): वार्ता का प्राथमिक उद्देश्य डेपसांग और डेमचोक जैसे शेष तनाव वाले क्षेत्रों से दोनों देशों की सेनाओं को पूरी तरह पीछे हटाना है।
- LAC का सम्मान और गश्त अधिकार: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 2020 से पूर्व की स्थिति बहाल करना और दोनों देशों के सैनिकों को उनके पारंपरिक गश्ती स्थलों तक निर्बाध पहुँच प्रदान करना।
- विश्वास बहाली के उपाय (CBMs): सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित सैन्य झड़प या गलतफहमी को रोकने के लिए हॉटलाइन और फ्लैग मीटिंग्स के ज़रिए संवाद को सुदृढ़ करना।
यह वार्ता क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
एशिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच सीमा पर शांति केवल सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव द्विपक्षीय व्यापार, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सीमा तनाव कम होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और राजनयिक संबंध दोबारा सामान्य हो सकेंगे।
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